
लोकतंत्र टाईम्स मंदसौर – शुक्रवार को महेश्वर में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में धार्मिक शहरों में शराबबंदी पर फैससा लिया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में लिए गए फैसले में मंदसौर शहर भी इसमें शामिल हुआ है। मंदसौर नगर पालिका की सीमा क्षेत्र में संचालित शराब दुकानों के बंद होने की स्थिति बन गई है। नपा सीमा क्षेत्र में करीब 11 शराब दुकानें है, जो कंपोजिट होकर अंग्रेजी व देशी है। हालांकि, राजपत्र में नोटिफिकेशन होगा, इसमें क्या दिशा निर्देश रहते हैं, उसके तहत आगामी निर्णय हो सकेगा। शराबबंदी का यह निर्णय विश्व विख्यात पशुपतिनाथ मंदिर को धार्मिक नगरी घोषित करने से हुआ है।
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने 26 दिसंबर 2011 को मंदसौर को पत्रिव नगरी को धार्मिक नगरी घोषित किया था। इसके तहत 100 मीटर का दायरा तय हुआ था। अब नए निर्णय के तहत मंदसौर नपा क्षेत्र को शामिल किया गया है। मंदसौर नपा क्षेत्र की 11 दुकानें बंद होने से करीब 50 करोड़ से अधिक राजस्व के प्रभावित (नुकसान) होने का अनुमान है। नई नीति 01 अप्रैल 2025 से लागू होगी। नई आबकारी नीति के तहत मंदसौर शहर में शुक्ला चौक, पुराना बस स्टैंड के पीछे, पुराना बस स्टैंड के सामने, रेलवे स्टेशन, महाराणा प्रताप, कृषि उपज मंडी, इंदिरा नगर, संजीत नाका, कालाखेत, सीतामऊ फाटक क्षेत्र, भुनियाखेड़ी शामिल हो रही है। ऐसे में ये सभी दुकानें आने वाली 01 अप्रैल से बंद होने की कगार पर है।
मध्यप्रदेश के 17 धार्मिक नगरों की 47 शराब दुकानें पूरी तरह बंद की जाएंगी। इन दुकानों को कहीं शिफ्ट भी नहीं किया जाएगा। एक अप्रैल से ये फैसला लागू होगा। महेश्वर में शुक्रवार को हुई कैबिनेट बैठक में इसका फैसला लिया गया।
वो 17 शहर, जहां शराबबंदी–
उज्जैन, दतिया, पन्ना, मंडला, मुलताई, मंदसौर, मैहर के अलावा ओंकारेश्वर, महेश्वर, ओरछा, चित्रकूट और अमरकंटक के नगर परिषद क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा ग्राम पंचायत स्तर पर सलकनपुर माता मंदिर, बरमान कला, बर्मन खुर्द, कुंडलपुर और बांदकपुर में पांच किलोमीटर के दायरे में शराबबंदी की मौजूदा नीति जारी रहेगी।
