रतलाम : शासकीय मेडिकल कॉलेज की मशीनी अव्यवस्थाओं पर उठा सवाल।

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एसडीपी मशीन व मशीन लाइसेंस स्वीकृत फिर भी संचालन क्यों नहीं–बादल वर्मा (रक्तमित्र )

क्या जिम्मेदार कर रहे अनहोनी का इंतजार…?

लोकतंत्र टाइम्स/रतलाम,बजंली रोड स्थित शासकीय मेडिकल कॉलेज जो करोड़ो रुपये की लागत से बना है जिम्मेदारों द्वारा बताया जाता है पर शासकीय मेडिकल कॉलेज की मूलभूत सुविधाओ व मशीनरी सुविधाओं पर क्यों ध्यान नहीं दिया जाता है। अभी बारिश का मौसम चल रहा है और इस मौसम में कई जानलेवा गंभीर बीमारीयो का भी प्रकोप बढ़ता जाता है ऐसे में अभी चल रही जानलेवा बीमारी डेंगू का प्रकोप बढ़ता जा रहा है जिले मे लगभग 25 डेंगू के मरीज़ पाए गए हैं और आगे भी डेंगू के मरीज बढ़ते ही जा रहे हैं।

प्रशासन द्वारा जारी एडवाइसरी गंभीर बीमारी डेंगू के लक्षण में बताया गया की सामान्य प्रकार के डेंगू में तेज सिरदर्द, ऑखों के पिछे की ओर दर्द, शरीर पर लाल चकते या दाने, जोड़ों व पेशियों में दर्द होना दिखाई देता है। जब डेंगू घातक अवस्था में पहुंचता है तो उक्त लक्षणों के साथ-साथ मसुडों व ऑतों से रक्त का स्त्राव होना अथवा खुन में प्लेटलेट का कम होना लक्षण पाए जाते है।

जिम्मेदार मशीनी सुविधाओं पर कब देगा ध्यान,

डेंगू बीमारी से ग्रसित मरीजों में प्लेटलेट्स की कमी होने के कारण परिजनों को प्लेटलेट्स के लिए 5 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है तथा मानव सेवा समिति(ब्लड बैंक) द्वारा ब्लड लेकर जो प्लेटलेट्स दिया जाता है उसमे एक बोतल में लगभग 4 से 5 हजार प्लेटलेट्स मरीज़ के परिजनों को दिए जाते हैं पर जब बात शासकीय मेडिकल कॉलेज की आती है तो मेडिकल कॉलेज में जो एसडीपी प्लेटलेट्स मशीन मौजूद हैं उस मशीन के माध्यम से एक बोतल ब्लड में लगभग 60 हज़ार से 65000 प्लेटलेट्स मुहैया कराए जाते हैं।

रक्तमित्र समाजसेवी बादल वर्मा द्वारा लोकतंत्र टाइम्स न्यूज के माध्यम से बताया गया की मरीजों के परिजनों को प्लेटलेट्स के लिए 5 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है व मरीजों के परिजनों को पहले ब्लड के लिए भटकना पड़ता है शासकीय मेडिकल कॉलेज में एसडीपी मशीन व मशीन का लाइसेंस पूर्व में ही मिल चुका है यह सारी सुविधाएं होने के बावजूद जिम्मेदारों की लापरवाही नजर आती है फिर भी शासकीय मेडिकल कॉलेज द्वारा लापरवाही में एसडीपी मशीन का संचालन की ओर क्यों नहीं जाता है।

शासकीय मेडिकल कॉलेज में अधिकतर ग्रामीण निवासी ही आते हैं जिसमें बहुत से मरीजों के पास वाहन ना होने के कारण इधर उधर जरूरी दवाइयों के लिए भी भटकना पड़ता है व मरीजों को असुविधा ना हो इसलिए एसडीपी मशीन का संचालन भी जरूरी है एक बोतल ब्लड में 3 से 4 मरीजों को प्लेटलेट्स मुहैया कराया जा सकता है जिससे मरीजों को प्लेटलेट्स समय पर मिल सकता है ।

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