रतलाम-व्यापम घोटाले पर शासन तथा सीबीआई को नोटिस।

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पारस सकलेचा की पिटीशन पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश।

लोकतंत्र टाइम्स, रतलाम व्यापम घोटाला जुलाई 2009 में शासन के संज्ञान में आने तथा 17 दिसंबर 2009 को जांच कमेटी गठित करने के बाद भी 2010 से 2013 तक घोटाला होने पर जिम्मेदारों से पूछताछ करने की पूर्व विधायक पारस सकलेचा की पिटीशन पर सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश संजीव खन्ना तथा‌ न्यायाधीश संजय कुमार ने शासन तथा सीबीआई को नोटिस जारी करने का आदेश दिया ।

पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने मनाने उच्च न्यायालय इंदौर में पिटीशन क्रमांक 20371/2023 दायर कर उनके द्वारा STF को‌ 11 दिसंबर 2014 को दस्तावेज सहित 350 पेज के आवेदन पर कार्यवाही की मांग की थी । जिसे दिनांक 19/4/2024 को माननीय उच्च न्यायालय इंदौर ने निरस्त कर दिया इसके विरुद्ध सकलेचा ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने शासन को नोटिस जारी किया ।

वरिष्ठ अभिभाषक तथा राज्यसभा सांसद विवेक तनखा ने तथा सर्वम ऋतम खरे ने बहस की। सकलेचा ने अपने आवेदन में कहा कि एसटीएफ द्वारा 27 नंबर 2014 को विज्ञप्ति क्रमांक 21503/14 जारी कर व्यापम की जांच में बिंदु शामिल करने हेतु दस्तावेज सहित आवेदन आमंत्रित किए जाने पर उन्होंने 11 दिसंबर 2014 को दस्तावेज सहित 350 पेज का आवेदन दिया था । एसटीएफ को 12 जून 2015 को मौखिक साक्ष्य के अतिरिक्त 71 पेज का लिखित बयान तथा 240 पेज के दस्तावेज दिये ।11 से 13 सितंबर 2019 को एसटीएफ में पुनः 13 घंटे तक बयान देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की ।

सीबीआई में अक्टूबर 2016 में बयान देने के बाद आवेदन को मुख्य सचिव मध्य प्रदेश शासन को कार्यवाही करने हेतु भेजा , जिस पर भी आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई ।सकलेचा ने अपने आवेदन में व्यापम घोटाले में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज‌ सिंह जी‌, जिनके पास चिकित्सा शिक्षा विभाग भी था , मुख्य सचिव , पुलिस महानिदेशक , प्रमुख सचिव सचिव चिकित्सा शिक्षा , चिकित्सा शिक्षा संचालक ,व्यापम के अध्यक्ष आदि जिम्मेदारों अधिकारीयो की फर्जीवाड़े में भूमिका पर दस्तावेज पेश कर उनसे पूछताछ की मांग की थी।

दिसंबर 2009 में शासकीय तथा निजी चिकित्सा महाविद्यालय में भर्ती की जांच के आदेश के बाद भी निजी चिकित्सा महाविद्यालय की भर्ती की जांच नहीं करने का भी अपने आवेदन में उल्लेख किया था ।सकलेचा ने आवेदन में कई दस्तावेजों का हवाला देकर कहा कि सीबीआई तथा एसटीएफ ने व्यापम फर्जीवाड़े की जांच में काफी लीपापोती की है । और अनेकों महत्वपूर्ण दस्तावेजों को जांच में शामिल न कर बड़े लोगों को बचाने का कार्य किया है । तथा मात्र रेकेटीयर , दलाल, स्कोरर, साल्वर , छात्र , अभिभावक तथा नाम मात्र के छोटे शासकीय अधिकारी को आरोपी बनाया है । उन्होंने अपने आवेदन में कहा कि इतना बड़ा रैकेट लगातार 10 साल तक चलना सत्ता और प्रशासन के सहयोग के बिना संभव नहीं है।

सकलेचा ने अपने आवेदन में लगभग 850 पेज के दस्तावेजी साक्ष्य अपने तथ्यो के प्रमाण में पेश कर निर्धारित समय सीमा में विवेचना कर नियमानुसार कार्यवाही करने की प्रार्थना न्यायालय में की ।

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