
युद्ध भूमि योद्धा तपे, सूर्य तपे आकाश, तपस्वी साधक अंदर तपे ,करें कर्मों का नाश।
लोकतंत्र टाइम्स, पारा, जयंत ग्राम की धरा पर भव्यतिभव्य चातुर्मास पुण्य सम्राट के दिव्य आशीर्वाद से साध्वी चारित्रकला महाराज साहब आदि ठाणा 7 की निश्रा मे तपोत्सव व ज्ञानोत्सव के चलते नगर मे लीला लहर है।
जैन धर्म एवं जिनशासन में तप आराधना का विशिष्ट महत्व है तीर्थंकर परमात्मा ने कर्मक्षय का उत्कृष्ट मार्ग तप बताया है जिस पर आरुढ़ होकर जीव अपनी आत्मा पर लगे हुए कर्मरज को दूर कर मोक्ष के अविचल सुख को प्राप्त करता है ।
जंयन्त ग्राम पारा की पावन भूमि पर चारित्र कला महाराज साहब की 90 वी ओली की पुर्ण आहुति और अहर्मर्निधी महाराज साहब की 76 वी ओली जी की उत्कृष्ट तपस्या की अखिल भारतीय राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद परिवार अनुमोदना करता है।
आपने यह महान तप करके अपनी काया को तपाकर जीवन को निर्मल बनाया, धर्ममय, तपमय जीवन में आपकी उत्तरोत्तर अभिवृद्धि हो एवं तप-जप एवं आराधना के द्वारा आपका मोक्ष मार्ग प्रशस्त बने।
ऐसी मंगलकामना करते है। आपकी खूब खूब अनुमोदना।
चली चली तपोत्सव और ज्ञानोत्सव की लहर चली अनुमोदना करें भक्तों की टोली नगर नगर गली गली साध्वी के दर्शन वन्दन व उत्कृष्ट तपस्या की अनुमोदना करने पारा नगर पहुंचे परिषद् राष्ट्रीय मिडिया प्रभारी ब्रजेश बोहरा ने बताया कि संघ मे तपोमहोत्सव निमित्त धार्मिक आयोजन 16 अक्टूम्बर से शुरू होकर व 18 अक्टूबर को पारणा तक चलेगा।
