
लोकतंत्र टाइम्स,भारत,ग्लोबल हंगर इंडेक्स वर्ष 2024 में कहा गया है कि भारत में भूख का ‘गंभीर’ स्तर व्याप्त है। इसमें भारत को 127 देशों में 105वें स्थान पर रखा गया है,वर्ष 2024 के हंगर इंडेक्स में भारत का स्कोर 27.3 है जो गंभीर बना हुआ है। वही पड़ोसी देश भी हम से बेतहर वर्ष 2024 के इस इंडेक्स में नेपाल 68, श्रीलंका 56 और बांग्लादेश 84वें नंबर पर है।

यह पता चलता है कि इस साल भारत की कुपोषित आबादी प्रभावी रूप से दुनिया के सातवें सबसे ज्यादा आबादी वाले देश के रूप में चिन्हित की जायेगी बेहद चिंताजनक” माना जा सकता है। यह सबसे बुनियादी इंसानी जरूरतों पर्याप्त,भोजन और पोषण, जो कि बहु प्रचारित ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ का फायदा हासिल करने के लिए जरूरी है।

भारतीय राज्य मशीनरी की घोर एवं प्रणालीगत विफलता को भी उजागर करता है। वित्तीय वर्ष 2024 के दौरान 6.8 फीसदी के विकास दर और लगभग चार ट्रिलियन डॉलर की अनुमानित जीडीपी के साथ वैश्विक स्तर पर पांचवें स्थान पर है इतनी बड़ी इकोनोमी होने के बाद भी कितनी चिंता की बात है। एक तरफ सरकार बड़ी बड़ी अंतोदय व राशन योजना चला कर देश से भूखमरी को जड़ से खत्म करने की बात कर रही है। तो यह योजना केवल मौखिक ही दर्शित हाेती दिख रही हे। धरातल पर तो केवल देश का गरीब जनादेश भूख से लड़ता जूझता दिख रहा है।
