जिन नर्सिंग कॉलेजों के पास अपने अस्पताल नहीं हैं, उन्हें अदालत से राहत मिली

लोकतंत्र टाईम्स –भोपाल (मध्य प्रदेश): हाईकोर्ट की जबलपुर स्थित मुख्य पीठ ने नर्सिंग काउंसिल की मौजूदा रजिस्ट्रार अनीता चांद के खिलाफ जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। नर्सिंग धोखाधड़ी मामले में लॉ स्टूडेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की जनहित याचिका सहित अन्य नर्सिंग मामलों पर गुरुवार को जस्टिस संजय द्विवेदी और जस्टिस अचल कुमार पालीवाल की विशेष पीठ में सुनवाई हुई।
अनीता चंद की नियुक्ति से विवाद खड़ा हो गया था क्योंकि उन पर आरोप है कि उन्होंने बिना भौतिक सत्यापन के आरकेडीएफ नर्सिंग कॉलेज की रिपोर्ट दे दी थी। कॉलेज का वास्तविक परिसर 5 हजार वर्ग फीट भूमि पर स्थित है, लेकिन चंद ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि यह 20 हजार वर्ग फीट पर बना है और इसे उपयुक्त बताया। इसके अलावा, हाईकोर्ट ने नर्सिंग कॉलेजों को राहत दी है, जबकि उनके पास अपना अस्पताल नहीं है, क्योंकि वे 2013 से संचालित हो रहे हैं।
कई नर्सिंग कॉलेजों की ओर से याचिका दायर कर अनुरोध किया गया था कि वे 2013 से संचालित हैं, जिन्हें हमेशा सरकारी अस्पताल से संबद्धता के आधार पर मान्यता दी जाती थी। लेकिन इस वर्ष अचानक नर्सिंग काउंसिल द्वारा उन्हें मान्यता के लिए आवेदन करने से रोक दिया गया है। अपना स्वयं का 100 बेड का अस्पताल न होने के कारण उन्हें मान्यता से वंचित होना पड़ रहा है।
इस पर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपने जवाब में कहा कि नर्सिंग शिक्षा संस्थान मान्यता नियम 2018 के प्रावधानों के अनुसार किसी भी संस्थान को स्वयं के 100 बिस्तर वाले अस्पताल या संबद्ध अस्पताल के बिना मान्यता नहीं दी जा सकती।
हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता से कहा है कि सरकार द्वारा नियम-परिनियमों में किए गए किसी भी बदलाव को जनहित याचिका के लंबित रहने तक लागू न किया जाए। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी से यह स्पष्ट हो गया है कि नर्सिंग और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों की संबद्धता का जो नियंत्रण सरकार ने अधिनियम में संशोधन कर क्षेत्रीय विश्वविद्यालय को सौंपा था, वह सत्र 2024-25 में लागू नहीं हो पाएगा।
