
लोकतंत्र टाईम्स,नागदा- उज्जैन जिले से गुजरने वाले देवास- बदनावर- उज्जैन- गरोठ एवं प्रस्तावित उज्जैन- जावरा राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण से उत्पन्न हुई किसान एवं आसपास के रह वासियों की समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। पूर्व आईएएस अधिकारी डॉक्टर हीरालाल त्रिवेदी ने किसानों के पक्ष में बयान देते हुए बताया केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी को किसानों एवं राजमार्ग के आसपास के रह वासियों के द्वारा अभी तक कई ज्ञापन दिए गए। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री को जिम्मेदार ठहराते हुए बताया की उनके द्वारा आठ पत्र भी लिखे गए, उसके निराकरण के लिए क्या कदम उठाए गए कार्यवाही की कोई जानकारी से संतुष्ट नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि परिवहन मंत्री नितिन गडकरी लच्छेदार भाषा में बात करते हैं, किसानों को दो गुना मुआवजा देने की बात कही जाती है, परंतु वास्तव में उन्हें बाजार मूल्य का 25% भी नहीं मिलता, इसको बढ़ाने के लिए क्या किया..? राष्ट्रीय राजमार्ग के दोनों तरफ किसानों एवं आसपास के रह वासियों के आने जाने एवं पानी निकासी से संबंधित जो समस्या होती है उन्हें काम करने के लिए विभाग ने क्या निर्देश दिए तथा उज्जैन- गरोठ राजमार्ग के आसपास पक्का सर्विस रोड ना होने से उज्जैन नगर वासियो को पीढ़ी दर पीढ़ी परेशान होना पड़ेगा, इसके निदान के लिए क्या निर्देश दिए गए हैं..?
इसकी कोई जानकारी संबंधित शिकायत कर्ताओं को नहीं उपलब्ध कराई गई है। इंगोरिया चौपाटी से बलेड़ी भैसला चौपाटी एवं सरसाना जोड़ तक सर्विस रोड बनाने के संबंध में भी हल की कोई जानकारी नहीं दी है। सपक्ष के प्रवक्ता जू माहुर करने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में दोनों तरफ के प्रधानमंत्री सड़क पीडब्ल्यूडी एवं पंचायत सड़क से मिट्टी मोहर्रम और गिट्टी डंपरों द्वारा ट्रांसपोर्ट की जाती है जिससे आसपास की सभी सके बर्बाद हो गई है उनके सुधार के लिए भी पत्र में गडकरी जी से पूछा गया था, कि उन्होंने मरम्मत के निर्देश दिए हैं या नहीं और कितना फंड जारी किया है।उन्होंने पत्र में परियोजना संचालक उज्जैन इकाई की मनमानी का भी उल्लेख किया था लेकिन पत्र के जवाब में संबंधित शिकायतकर्ताओं को कोई सूचना या जवाब नहीं दिया गया।
यह जानकारी प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सपाक्स उज्जैन के प्रवक्ता जे. आर.माहुरकर द्वारा दी गई।
