लोकतंत्र टाईम्स,नागदा जं. मंगलवार को जनसुनवाई में नागरिक अधिकार मंच के अभय चोपडा एवं अधिवक्ता अभिषेक चोरसिया द्वारा मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, संभाग नागदा द्वारा स्थानीय आम निर्धन, मध्यमवर्गीय एवं शोषित जनता की समस्याओं के निराकरण के संबंध मे कार्यवाही हेतु अनुविभागीय अधिकारी नागदा को आवेदन दिया गया।आवेदन में बताया कि विद्युत कंपनी द्वारा विद्युत बिल उपभोक्ता के मोबाईल पर व्हाटसप पर दिया जाता है तथा बहुत से उपभोक्ता व्हाटसप मोबाईल का उपयोग नहीं करते। बहुत से उपभोक्ता समय पर मोबाईल डाटा नहीं डलवा पाते तथा बहुत से मोबाईलो मे डाटा तीन दिनो मे समाप्त हो जाता है. जिस कारण उनका विद्युत बिल समय पर नहीं भरा जाता है और उनका कनेक्शन कट जाता है। कुछ उपभोक्ताओं के मोबाईल स्क्रीन छोटी होने से विद्युत बिल पढ़ा नहीं जा सकता है। पिछले बिल डिलीट हो जाने से पुराने बिल से मिलान नहीं कर सकता है।
सर्वोच्च न्यायालय ने भी व्हाटसप के माध्यम से सूचना को वैध नही माना है तथा हार्ड कापी देना जरूरी बताया है। विद्युत मीटर खराबी शिकायत की जांच विद्युत विभाग के अधिकारियो द्वारा ही करवाई जाने से शंकास्पद मामला रहता है अतः सम्पूर्ण जाच की विडीयोग्राफी दिलवाई जाय अथवा अन्य निष्पक्ष व्यवस्था करवाई जाय। नये स्मार्ट विद्युत मीटर लगाना जरूरी नही है लेकिन दबावपूर्ण तरीके से उपभोक्ता के यहा लगाये गये। जो कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन है। अतः इस मामले में कार्यवाही की जाय। नये विद्युत मीटर के साथ उसके संचालन कि सर्विस बुक नहीं दी गई एवं जो बिल दिया जाता है उसके शुल्क लेने का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया उपभोक्ता की सहमति अर्थात द्विपक्षीय अनुबंध नहीं किया गया। मीटर की सर्विस बुक और उपभोक्ता के बिल मे लगाये गये सभी चार्जेस का विस्तृत खुलासे का अनुबंध किया जाता है। लेकिन उपभोक्ता अधिनियम एवं संविदा अधिनियम का उलंघन कर गैर कानूनी और अवैधानिक कार्य किया जा रहा। अतः विधिवत संचालन करवाया जाय। जानकारी के अभाव मे या भूल गलती या जानबूझकर उपभोक्ता द्वारा बिल नही भरने पर उपभोक्ता का कनेक्शन बिना किसी सूचना के काट दिया जाता है। जबकि शासन के पैसे से स्थापित मप्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड का पारम्भिक काम जनता को सुविधा उपलब्ध करवाना है। बिना सूचना के विद्युत कनेक्शन काटना प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन होकर गेर कानूनी और अवैधानिक है। इस पर सुधार किया जाना चाहिये।
सम्पूर्ण प्रदेश के लिये बड़ी निविदा ग्यारंटी रखने से अडानी का एकाधिकार होने से उंचे दरो और मनमाने चार्जेस वसूले जा रहे। जिला स्तर पर अलग-अलग एजेंसीज को कार्य संचालन का मौका देकर जनता को एकाधिकार वाद और भ्रष्टाचार से मुक्त करवाया जाय। एकाधिकार और भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक मे शिकायत कर प्रकरण दर्ज करवाया जाय। विद्युत नियामक आयोग के स्थान पर सिव्हील न्यायालय को अधिकार दिये जाय। नियामक आयोग कि प्रक्रिया कि जानकारी नहीं है, अतः जनता इससे न्याय प्राप्त करने मे वंचित है हर सम्भागीय अभियंता के यहा विधुत नियम आयोग कि प्रथक से स्थापना की जाय।प्रतिमाह सम्भागीय अभियंता के पास प्राप्त होने वाली विद्युत और सप्लाय किये जाने वाली विद्युत कि गणना के आकड़ो का खुलासा किया जाय। प्रतिमाह प्राप्त होने वाले व्यय और उस मद के होने वाले खर्चे के आकड़े का खुलासा किया जाय। प्रति यूनिट विद्युत उत्पादन क्रय एवं विक्रय लागत के आकड़ो का खुलासा किया जाय। मीटर के लागत मूल्य और मीटर कि किराया राशि का खुलासा किया जाय. जो उपभोक्ता स्वयं के पैसे से मीटर लगाना चाह रहा उसे भुगतान लेकर उप्लब्ध करवाया जाय एवं किराये कि राशि को लीज रेंट के रूप में मीटर लागत से घटाकर उसके मूल्य मे से घटाया जाए। उपरोक्त समस्त जनहित से जुडी समस्याओं के निराकरण करने की मांग नागरिक अधिकार मंच के अभय चोपडा एवं अधिवक्ता अभिषेक चोरसिया द्वारा की है।
