भाई दूज के 300 करोड़ नहीं है , विज्ञापन पर खर्च कर दिये 500 करोड़
27 माह से नया पंजीयन बंद , 30 लाख पात्र लाडली बहना के साथ धोखाधड़ी,नया पंजीयन प्रारंभ करें , 60 साल का प्रतिबंध हटाए ,अप्रैल 2026 से ₹3000 प्रतिमाह दे

लोकतंत्र टाईम्स, रतलाम,लाडली बहना को भाई दूज पर ढाई सौ रुपए देने की घोषणा से मुकरना भाजपा सरकार के आर्थिक दिवालीये पन के साथ मानसिक दिवालीये पन की निशानी है। लाडली बहना के विज्ञापन के लिए 500 करोड़ है। लेकिन भाई दूज के लिए 300 करोड़ भी नहीं है। यह आरोप पूर्व विधायक पारस सकलेचा ने लगाया ।
सकलेचा ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव बतावे की उन्होंने 12 अक्टूबर को श्योपुर के महिला सम्मेलन में लाडली बहना को भाई दूज पर ढाई सो रुपए देने की घोषणा की थी या नहीं, और यदि हां तो, उससे क्यों मुकर गए। क्या सरकार के पास लाडली बहना को देने के लिए 300 करोड़ भी नहीं है…?
सकलेचा ने आरोप लगाया कि अगस्त 2023 से लाडली बहना में नया पंजीयन बंद कर 30 लाख पात्रता श्रेणी में शामिल लाडली बहना के संवैधानिक अधिकार की हत्या हो रही है..? उन्होंने कहा कि योजना के प्रारूप में पंजीयन बंद करने का करने का कोई उल्लेख नहीं था। यह सतत प्रवृत्ति की योजना है, और सतत प्रवृत्ति की 30 से अधिक योजनाओं मे पंजीयन निरंतर जारी है। फिर लाडली बहना में पंजीयन क्यों रोका गया ?? नया पंजीयन क्यों नहीं किया जा रहा हैं ??
सकलेचा ने आरोप लगाया कि सरकार चरणबद्ध पंजीयन की झूठी बात कर रही है। जून 2023 के चार माह बाद अक्टूबर 2023 में ढाई सौ रुपए बढ़ाए। उस अनुसार हर चार माह बाद ढाई सौ रुपए बढ़ना चाहिए, और इस अनुसार लाडली बहना को इस दिवाली पर 2500रुपए प्रतिमाह मिलना चाहिए।
सकलेचा ने कहा कि योजना के प्रारूप में 60 साल की उम्र के बाद योजना से बाहर करने का उल्लेख नहीं था, उसके बाद भी 6 लाख से अधिक लाडली बहना को बाहर कर उन्हें हितलाभ प्राप्त करने के मौलिक अधिकार से वंचित कर दिया गया ?? जो लाडली बहना 60 साल के बाद भी जीवित रहती है। क्या उन लाडली बहना की जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है ।
सकलेचा ने कहा कि सरकार तत्काल नया पंजीयन प्रारंभ करें। जो लाडली बहना अगस्त 2023 से पात्रता श्रेणी में आ गई है , उनका पंजीयन कर उन्हें अगस्त 2023 से राशि प्रदान की जाए। हित लाभ प्राप्त करने के लिए 60 वर्ष की उम्र का प्रतिबंध समाप्त कर उसे जीवन पर्यंत किया जाए। तथा अप्रैल 2026 से प्रत्येक लाडली बहना को ₹3000 प्रतिमाह दिए जाएं ।

मुलताई में कुछ बैंक, कुछ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बिना पार्किंग के संचालित हो रहे हैं, तथा कुछ लोगों ने पार्किंग के लिए जगह बहुत कम दी है। जो वाहन पार्किंग के लिए पर्याप्त नहीं है। इससे ग्राहको को वाहन खड़े करने में बहुत परेशानी होती है। आखिर बिना पार्किंग के बैंक कैसे संचालित हो रहे हैं। ये तो नियमों का उल्लघंन हो रहा है। सड़क किनारे वाहन खड़े करने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है। कई बार दुर्घटना तक हो जाती है। सरकारी जमीन पर वाहन खड़े हो रहे हैं । जबकि जिस भवन मे बैंक संचालित होती है उसकी स्वयं की पार्किंग होना जरूरी है। मुलताई में संचालित सभी बैंकों की पार्किंग व्यवस्था की जांच होना चाहिए।
कुछ बेसमेंट बिना अनुमति के बने हैं। कुछ व्यावसायिक भवनों के नक्शे बिना पार्किंग दिए पास हुए हैं। कुछ लोगों ने सरकारी जमीन पर पक्का अतिक्रमण कर लिया है। जांच होना चाहिए।
रवि खवसे, मुलताई (मध्यप्रदेश)