नागदा : कोलकता की घटना के विरोध में भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट द्वारा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को लिखा पत्र।

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लोकतंत्र टाइम्स/जीवन जैन/नागदा भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय सुनील सिंह जी यादव द्वारा कोलकाता की घटना पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को पत्र लिखकर आरोपियों पर कड़ी कार्यवाही की मांग की गई ट्रस्ट के राष्ट्रीय संरक्षक पं.रितिक ओझा महाराज (ओरछा वाले),राष्ट्रीय सचिव शिवम तिवारी, राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक उमरे,प्रदेश उपाध्यक्ष मनीष गुप्ता,उज्जैन जिला अध्यक्ष मुकेश विश्वकर्मा, उज्जैन जिला सदस्य मनोज सांवरिया, नागदा तहसील अध्यक्ष जीवनलाल जैन चायवाले ने पत्र के माध्यम से अपना विरोध व्यक्त किया एवं जानकारी दी की कोलकाता के आर जी कर मेडिकल कॉलेज की द्वितीय वर्ष की महिला पीजी छात्रा की नृशंस हत्या से भारत का पूरा समाज स्तब्ध है। यह जघन्य अपराध परिसर की तीसरी मंजिल पर सेमिनार हॉल के अंदर किया गया है पोस्टमॉर्टम के खुलासे में हत्या से पहले उसके साथ बलात्कार किया गया था। यह अपराध समाज में व्याप्त अराजकता और असुरक्षा का सूचक है।

भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट भारत की इस अनमोल बेटी की मृत्यु पर शोक व्यक्त करता है और मौजूदा परिस्थितियों की निंदा करता है, जिसके कारण परिसर के अंदर इस अपराध को अंजाम दिया गया। यदि शिक्षा के गढ़ में सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती है तो यह केवल प्रशासन की अक्षमता को दर्शाता है। इस समय देश भर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए घृणित रेप केस की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कुछ बेहद गंभीर और दिल दहला देने वाले खुलासे सामने आए हैं। ये रिपोर्ट न केवल अपराध की क्रूरता को दर्शाती है बल्कि पीड़िता की पीड़ा और संघर्ष को भी उजागर करती है।

1) अबनॉर्मल सेक्सुअलिटी और जेनाइटल टॉर्चर:- पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पीड़िता के प्राइवेट पार्ट्स पर गहरे घाव मिले हैं, जो अबनॉर्मल सेक्सुअलिटी और जेनाइटल टॉर्चर का परिणाम हैं। यह दिखाता है कि अपराधी ने बेहद क्रूर तरीके से पीड़िता के साथ व्यवहार किया।

2) गला घोंटने का प्रयास:-पीड़िता को चिल्लाने से रोकने के लिए उसके नाक, मुंह और गले को जोर से दबाया गया, जिसके कारण उसका थायराइड कार्टिलेज टूट गया। यह साफ संकेत देता है कि पीड़िता को मारने की पूरी कोशिश की गई थी।

3) शारीरिक चोटें:-सिर को दीवार से जोर से सटाने के कारण पीड़िता चिल्ला नहीं पाई। इसके अलावा, उसके पेट, होंठ, उंगलियों और बाएं पैर पर भी गंभीर चोटें पाई गईं, जो संघर्ष के दौरान हुई होंगी।

4) आंखों में चश्मा के टुकड़े:-आरोपी ने इतनी जोर से हमला किया कि पीड़िता के चश्मे के शीशे के टुकड़े उसकी आंखों में घुस गए। रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों आंखों, मुंह और प्राइवेट पार्ट्स से खून बह रहा था, जो इस घिनौने अपराध की बर्बरता को दर्शाता है।

5) चेहरे पर नाखूनों के निशान:-आरोपी के नाखूनों से बने खरोंच के निशान पीड़िता के चेहरे पर मिले, जिससे पता चलता है कि उसने खुद को बचाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था। यह निशान उसकी साहसिक लड़ाई की गवाही देते हैं।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि हमें महिलाओं की सुरक्षा के प्रति और अधिक जागरूक और संवेदनशील होने की आवश्यकता है। इस केस ने देशभर में गुस्सा और शोक की लहर पैदा कर दी है, और न्याय की मांग जोर पकड़ रही है।, मैं आपसे विनती करता हूं कि कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिले।

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