लोकतंत्र टाईम्स,नागदा- नागदा जंक्शन के भविष्य को लेकर शहर में तनाव का माहौल है। रेलवे द्वारा नागदा स्टेशन के स्थान पर भाटीसुडा स्टेशन विकसित करने के प्रस्ताव ने आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय नेताओं के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। इस योजना का कड़ा विरोध करते हुए भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुनील सिंह जी यादव ने रेल मंत्रालय को एक विस्तृत पत्र लिखा है, जिसमें इस योजना को तुरंत रद्द करने की मांग की गई है।

नागरिकों की प्रमुख आपत्तियां
नागरिकों का कहना है कि यह योजना नागदा शहर की जीवनरेखा को प्रभावित करेगी। उन्होंने इस संबंध में कई महत्वपूर्ण तर्क पेश किए हैंरात्रिकालीन यात्रा का संकट
दिल्ली से इंदौर और जयपुर से दक्षिण भारत की ओर जाने वाली लंबी दूरी की ट्रेनें अक्सर देर रात 11 बजे से 2 बजे के बीच नागदा पहुंचती हैं। अगर इन ट्रेनों का ठहराव भाटीसुडा में किया गया, तो यात्रियों को रात के सुनसान समय में 8 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करके नागदा लौटना पड़ेगा। इससे आम लोगों, खासकर स्लीपर क्लास में यात्रा करने वालों को भारी असुविधा होगी।
सुरक्षा पर गंभीर सवाल
भाटीसुडा से नागदा तक का मार्ग रात में सुनसान रहता है। अकेले सफर करने वाली महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह रास्ता बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है। यह योजना यात्रियों की सुरक्षा को सीधे तौर पर खतरे में डालती है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है।
आर्थिक बोझ में बढ़ोतरी
भाटीसुडा से नागदा आने-जाने के लिए यात्रियों को ऑटो या टैक्सी का सहारा लेना पड़ेगा, जिसका किराया ₹150 से ₹200 या उससे अधिक हो सकता है। यदि किसी को लेने-लाने के लिए दो बार ऑटो करना पड़े, तो खर्च दोगुना हो जाएगा। यह आर्थिक बोझ आम जनता के लिए अनुचित और अस्वीकार्य है।
जनप्रतिनिधियों से परामर्श का अभाव
नागरिकों का आरोप है कि इतने बड़े फैसले से पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों या शहर के नागरिकों से कोई राय नहीं ली गई। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन है और यह दिखाता है कि रेलवे ने जनहित को नजरअंदाज किया है।
तकनीक बनाम जनहित
नागरिकों का मानना है कि यह बदलाव केवल इंजन बदलने जैसी तकनीकी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए किया जा रहा है। उनका तर्क है कि अगर रेलवे यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा की कीमत पर केवल अपनी तकनीकी प्रक्रिया को प्राथमिकता दे रहा है, तो यह स्वीकार्य नहीं है।
रेल मंत्री को लिखे गए पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि तकनीकी सुधार आवश्यक हैं, तो उन्हें इस प्रकार लागू किया जाना चाहिए कि यात्रियों की सुरक्षा, समय और आर्थिक सुविधा पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
आगे क्या….?
इस मामले ने नागदा में एक बड़ा जन आंदोलन खड़ा कर दिया है। नागरिकों के साथ IHRCT के शिवम तिवारी, कृष्णा यादव, मनीष गुप्ता जीवनलाल जैन चाय वाले, मनोज सांवरिया, संतोष सिंह पवार, डॉ प्रेम कुमार वैद्य, कु.आस्था जैन, मोहनलाल गुर्जर, सोहन वर्मा, अनीता दुबे, सौंपा चटर्जी ने भी मांग की है कि प्रस्तावित भाटीसुडा स्टेशन योजना पर तत्काल रोक लगाई जाए और नागदा जंक्शन पर सभी ट्रेनों का ठहराव यथावत जारी रखा जाए। इस विरोध को देखते हुए, यह देखना होगा कि रेल मंत्रालय इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया देता है।
